सबको रहती है


Kavi King ASHI Dated: 2/6/07, Saturday,6:48 PM
सबको रहती है मुझसे शिकायत न जाने किस बात की,
मुझे तो बनाया ही है कुछ ऐसा ऊपर वाले ने,वरना क्या कमी थी मुझ नादाँ में ।
Kavi King ASHI Dated:4/6/07, Monday
हमारी एक बात से अआप इतना रूठ जयेंगेहमें क्या पता था ,
हमारी एक गलती से ये रिश्ता ही बिखर जाएगा ।
Kavi King ASHI


जलने के बाद दोबारा जलना गवारा नही किया,
ठुकराया जिन्होंने हमें हमने उनको अपनाना गवारा नही किया ।
Kavi King ASHI
दिल चीर के देख लो इसमे चेहरा तुम्हारा ही बसा है,
समझ न सके तुम ही तो इसमे दीवाने की क्या खता है,
हम तो जल गए बिन आग ही और वो उठा रहे मज़ा है,
प्यार तुमसे करते है कितना ये ज़माने को क्या पता है ।
Kavi King ASHI
तेरी इस बेरुखी को , हम ताउम्र सहेंगे ।
दिया जो ग़मों का जहर , खुशी से हम पियेंगे ।
हसरत जो दिल में वो दिखाऊँ कैसे ,
किस्मत में जो लिखा है वो मिटाऊँ कैसे ।
Kavi King ASHI
आँखें सूज गई रोते- रोते , आवाज भी अब तो जाने लगी है।
न आँसू गिर रहे हैं ,न साँस थम रही है ।
न जाने क्या बात है , दिल फिर भी चीख चीख के रो रहा है ।
आज न कोई दिलासा काम आएगी न किसीका प्यार,
आज तो टूट गया है दिल का वो तार जिससे बंधा था खुशिओं का संसार ।
Kavi King ASHI
तू जब नहीं होती है मेरे पास, तेरी ही याद आती है जहन में ।
महका जाती है मेरी रूह को फिर से जान फूंक जाती है मेरे तन बदन में ।
Kavi King ASHI
ख्वाहिश करता हूँ तू आती रहे इसी तरह मेरे जह्नों जिगर में ,
हर शख्श में तेरा ही अक्स नजर आए मेरी नजर को ,
जी भर के देखता रहूँ तुझे खामोशिओं में या सहर में ,
नसीब हो जाए जन्नत इन नजरों को इसी शहर में ।
Kavi King ASHI
हुई मुद्दत की ग़ालिब मर गया पर याद आता है
वो हर एक बात कहना की यूँ होता तो क्या होता ।
(By: Galib Sahab)
Kavi King ASHI
ये तो नहीं की ग़म नहीं, हां मेरी आँख नम नहीं ।
(By: Firaaq GorakhPuri)
Kavi King ASHI
पिघल रही हो शाम धीरे- धीरे ,
बढ़ रही हो बात धीरे - धीरे ,
हो बाँहों में बाहें ,
और ढल जाए ये रात धीरे - धीरे ,
और हो जाए दो जान धीरे - धीरे ।
Kavi King ASHI
ग़म छुपाने की एक अदा मुस्कुराना भी होती है,
वो समझते है की दिल को हर एक आह तराना ही होती है ।
क्स्भी मुस्कुरा के पास तो आइये, पास आके प्यार से गले तो लगाइए ।
क्या पता आप को कब से खड़े है इंतजार में ,
झुलस चुका है जिस्म और बचे दिल को अब और तो न जलाइए ।
Kavi King ASHI
इस दिल ने सब को प्यार देना चाहा ,
बाँहों में बाहें दाल , कुछ देर चलना चाहा ,
फिर आई एक मौज जिंदगी में आशी ,
थामा जो हाँथ हर किसी ने छुराना चाह ।
Kavi King ASHI