जलने के बाद दोबारा जलना गवारा नही किया,
ठुकराया जिन्होंने हमें हमने उनको अपनाना गवारा नही किया ।
दिल चीर के देख लो इसमे चेहरा तुम्हारा ही बसा है,
समझ न सके तुम ही तो इसमे दीवाने की क्या खता है,
हम तो जल गए बिन आग ही और वो उठा रहे मज़ा है,
प्यार तुमसे करते है कितना ये ज़माने को क्या पता है ।
तेरी इस बेरुखी को , हम ताउम्र सहेंगे ।
दिया जो ग़मों का जहर , खुशी से हम पियेंगे ।
हसरत जो दिल में वो दिखाऊँ कैसे ,
किस्मत में जो लिखा है वो मिटाऊँ कैसे ।
आँखें सूज गई रोते- रोते , आवाज भी अब तो जाने लगी है।
न आँसू गिर रहे हैं ,न साँस थम रही है ।
न जाने क्या बात है , दिल फिर भी चीख चीख के रो रहा है ।
आज न कोई दिलासा काम आएगी न किसीका प्यार,
आज तो टूट गया है दिल का वो तार जिससे बंधा था खुशिओं का संसार ।
तू जब नहीं होती है मेरे पास, तेरी ही याद आती है जहन में ।
महका जाती है मेरी रूह को फिर से जान फूंक जाती है मेरे तन बदन में ।
ख्वाहिश करता हूँ तू आती रहे इसी तरह मेरे जह्नों जिगर में ,
हर शख्श में तेरा ही अक्स नजर आए मेरी नजर को ,
जी भर के देखता रहूँ तुझे खामोशिओं में या सहर में ,
नसीब हो जाए जन्नत इन नजरों को इसी शहर में ।
हुई मुद्दत की ग़ालिब मर गया पर याद आता है
वो हर एक बात कहना की यूँ होता तो क्या होता ।
(By: Galib Sahab)
ये तो नहीं की ग़म नहीं, हां मेरी आँख नम नहीं ।
(By: Firaaq GorakhPuri)
पिघल रही हो शाम धीरे- धीरे ,
बढ़ रही हो बात धीरे - धीरे ,
हो बाँहों में बाहें ,
और ढल जाए ये रात धीरे - धीरे ,
और हो जाए दो जान धीरे - धीरे ।
ग़म छुपाने की एक अदा मुस्कुराना भी होती है,
वो समझते है की दिल को हर एक आह तराना ही होती है ।
क्स्भी मुस्कुरा के पास तो आइये, पास आके प्यार से गले तो लगाइए ।
क्या पता आप को कब से खड़े है इंतजार में ,
झुलस चुका है जिस्म और बचे दिल को अब और तो न जलाइए ।
इस दिल ने सब को प्यार देना चाहा ,
बाँहों में बाहें दाल , कुछ देर चलना चाहा ,
फिर आई एक मौज जिंदगी में आशी ,
थामा जो हाँथ हर किसी ने छुराना चाह ।
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